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दवाओं के ऑनलाइन बिक्री पर लगी रोक!

दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश के तहत उठाया कदम

अगर आप दवाइयों की खरीददारी ऑनलाइन करते हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है| साथ ही इस खबर से देश में ऑनलाइन दवाइयां बेचने वाली कंपनियों को भी बड़ा झटका लगने वाला है| ड्रग कंट्रोलर जेनरल ऑफ इंडिया (Drugs Controller General of India, DCGI) ने ऑनलाइन दवाइयां बेचने वाले ऐसे प्लेटफॉर्म, जिनके पास लाइसेंस नहीं है, उनके दवाइयां बेचने पर रोक लगा दी है| बिक्री पर बैन का आदेश सभी राज्यों में सर्कुलेट कर दिया गया है| इस क्षेत्र में फिलहाल कोई रेगुलेशन नहीं है और नित नए ऑनलाइन दवा का कारोबार करने वाली नई कंपनियां अस्तित्व में आते जा रही है| सरकार के इस कदम से ऐसी कंपनियां मुसीबत में आ गई हैं जो इस क्षेत्र में बिजनेस में पैसा लगा रही हैं या लगाने के प्रोसेस में हैं| रिपोर्ट के मुताबिक, Drugs Controller General of India (DCGI) ने ऑनलाइन दवाइयां बेचने वाले ऐसे प्लेटफॉर्म, जिनके पास इसका लाइसेंस नहीं है, उनके दवाइयां बेचने पर रोक लगा दी है|

ई-फार्मेसीज से जुड़े नियम-कानून पर चल रहा है काम

लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब तक नियामक एजेंसी ई-फार्मेसीज को लेकर नियम-कानून का ड्राफ्ट तैयार और जारी नहीं हो जाता तब तक यह रोक जारी रहेगी| नियमन को लेकर प्रस्ताव है कि ई-फार्मेसीज को सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन किया जाए और उनकी डॉक्टरों और मरीजों को दी जाने वाली प्रिस्क्रिप्शन्स का रिकॉर्ड रखा जाए| वेबसाइट ने सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation, CDSCO) के सूत्र के हवाले से कहा है कि ई-फार्मेसीज से जुड़े नियम-कानून पर अभी भी काम चल रहा है|

Drugs and Cosmetics (D&C) Act का होता है उल्लंघन

Drugs Controller General of India (DCGI) के हेड वी.जी सोमानी ने एक खत लिखकर यह आदेश दिया है| उनके इस आदेश के बाद इस बिजनेस में पैसा लगा चुके कई प्लेटफॉर्म्स अब मुश्किल में आ गए हैं| DCGI ने अपने लेटर में 12 दिसंबर, 2018 को आए दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया है, यह केस एक डर्मेटोलॉजिस्ट डा. ज़हीर अहमद ने दाखिल किया था| इस आदेश में कहा गया था कि दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगना चाहिए क्योंकि ई-फॉर्मेसीज के पास इसके लिए कोई लाइसेंस नहीं होता, जिससे Drugs and Cosmetics (D&C) Act का उल्लंघन होता है|

विदित हो की पिछले महीने मद्रास हाई कोर्ट ने भी ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर एक अंतरिम आदेश के तहत रोक लगा दी थी और केंद सरकार से इस बारे में सलाह मांगी थी| रोक लगाने की मांग करते हुए केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने एक याचिका दायर कर कहा था कि खराब और बिना रेगुलेशन के दवा बेचने से आम लोगों के जीवन पर काफी खतरा मंडराता है|

780 अरब रूपए का है भारत का दवा बाज़ार

दवाओं के रिटेल डीलरों का तर्क है की कुछ ऑनलाइन कंपनियों की भारत के दवा बाजार पर भी नजर है जो की 12 अरब डॉलर यानी करीब 780 अरब रूपए का है| ऑनलाइन दवा विक्रेताओं की बढती तादाद को लेकर दवा विक्रेताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है| हाल में भारत के करीब साढ़े आठ लाख दवा विक्रेताओं ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में एक दिन की हड़ताल भी की थी|

हालांकि, दवाइयों के खुदरा विक्रेता इसकी ऑनलाइन बिक्री का विरोध कर रहे हैं पर देखा जाए तो इनके सिस्टम में भी कई खामियां हैं| जैसे खुदरा दवा विक्रेता बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के भी दवाइयां बेचते रहे हैं| ऐसे में, सरकार के लिए दवाओं की बिक्री के बेहतर तौर तरीके तैयार करते समय ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन विक्रेताओं के क्रियाकलापों पर भी ध्यान देना बेहद जरुरी है|