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जानीये क्या है एलीफेंट बांड?

कालेधन पर है सरकार की नजर

विदेशों में जमा कालाधन मोदी सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है|2014 के लोकसभा चुनावों की रैलियों में प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था| उस समय विदेशों में जमा इस बेनामी संपत्ति को वापस लाने के वादे  भी किये गए थे| हालांकि पहले कार्यकाल में विदेशों में जमा कालेधन पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं हुई थी| मोदी सरकार के दुसरे कार्यकाल में एलीफैंट बांड के माध्यम से विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने की कोशिशें कि जा रही हैं|

क्या है एलीफेंट बांड?

एलीफेंट बांड दरअसल,वाणिज्‍य मंत्रालय द्वारा गठित उच्‍च स्‍तरीय सलाहकार समूह (HLAG) ने भारत में काले धन को वापस लाने के लिए एक नई माफी योजना है।इस प्रस्‍तावित योजना के तहत, बेहिसाबी संपत्ति धारकों को न्‍यूनतम टैक्‍स का भुगतान करने के जरिये अपनी संपत्ति का खुलासा करने का अवसर दिया जाएगा। इस नई योजना के तहत, कालाधन रखने वालों को अपनी बेहिसाबी संपत्ति का 40 प्रतिशत हिस्‍सा लंबी-अवधि वाले इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बांड(Elephant Bond)में निवेश करना होगा। ऐसे बांड जारी करने से होने वाली आय का उपयोग भारत में बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा।

ये हैं प्रावधान:

व्‍यक्ति जो अपने कालेधन को एलीफेंट बांड में निवेश करेगा उसे अपनी बेहिसाबी संपत्ति पर 15 प्रतिशत टैक्‍स का भुगतान करना होगा। इसके बाद घोषित संपत्ति का 40 प्रतिशत हिस्‍सा एलीफेंट बांड में निवेश करना होगा। इस तरह के बांड पर ब्‍याज की दर लीबोर (LIBOR और 500 आधार अंक) से जुड़ी होगी और कूपन दर 5 प्रतिशत रहेगी। एलीफेंट बांड पर मिलने वाले ब्‍याज पर कर देना होगा और इसकी दर 75 प्रतिशत होगी।

एमनेस्टी स्कीम है ये बांड :

इस योजना के तहत सरकार विदेशों में जमा कालेधन के खुलासे पर राहत देगी|यह योजना हर किसी के लिए खुली होगी, जो अपने कालेधन का खुलासा करना चाहता है और जुर्माना एवं मुकदमा से बचना चाहता है।दरअसल एचएलएजी ने सिफारिश की है कि एलीफेंट बांड के सब्‍सक्राइर्ब्‍स को जुर्माने और विदेशी विनिमय, कालाधन कानून और कर कानून सहित सभी कानूनों के तहत मुकदमे से माफी दी जाए। इस बांड की परिपक्‍वता अवधि 20 से 30 साल की होगी। एलीफेंट बॉन्ड का आइडिया अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला की हाई लेवल कमेटी ने दिया था|मोदी सरकार विदेश में जमा काला धन वापस लाने के लिए ‘एलीफेंट बॉन्ड’ पर विचार कर रही है| एक अनुमान के मुताबिक एलीफेंट बॉन्ड योजना से विदेश में जमा 500 अरब डॉलर काला धन वापस आ सकता है|हालांकि अभी ये योजना सुझाव के स्तर पर है| सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है|लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस बारे में जवाब दिया|

पहले भी हुई थी कोशिशें:

एलीफेंट बॉन्ड योजना सरकार द्वारा की गयी पहली कोशिश नहीं है|कालेधन को देश में लाने की कोशिशें पहले भी गयी थी जो बेनतीजा रहीं|1981 में कालेधन के लिए स्‍पेशल बियरर बांड अधिनियम 1981 को पेश किया गया था। जबकि मोदी सरकार ने 2016 में प्रधान मंत्री गरीब कल्‍याण डिपोजिट योजना (PMGKDS) को पेश किया था, जिसके तहत कोई भी व्‍यक्ति टैक्‍स, सरचार्ज और जुर्माना अदा कर अपनी अवैध संपत्ति को वैध बना सकता था। हालांकि ये योजनाएं  ज्‍यादा सफल नहीं हुई क्‍योंकि इसमें मुकदमे एवं कानूनी कार्रवाई से कोई छूट नहीं थी।