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बंद हो सकती है वोडाफ़ोन-आइडिया!

सरकारी सहायता नहीं मिली तो वोडाफोन-आइडिया को बंद करना पड़ेगा- कुमार मंगलम बिड़ला

टेलिकॉम सेक्टर की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं| इस क्रम में एक और मोड़ तब आया जब आज प्रेस से बात करते हुए दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया को लेकर एक बड़ा बयान दिया| बिड़ला ने इंटरव्यू में कहा कि हमने ऐसा कल्चर कारोबार में पैदा किया है कि यदि अपेक्षा के अनुसार सरकारी सहायता नहीं मिली तो वोडाफोन आइडिया को बंद करना पड़ेगा| उन्होंने अपनी बात पर जोड़ देते हुए कंपनी की ख़राब आर्थिक स्थिति के बारे में बताते हुए कहा की कंपनी की हालत खराब है और डूबते पैसे में और पैसा डूबने के लिए लगाने का कोई मतलब नहीं है|

इससे कुछ समय पूर्व इस संयुक्त उपक्रम में सबसे बड़े हिस्सेदार ब्रिटेन के वोडाफोन समूह की तरफ से भी कुछ ऐसा ही बयान आया था| तब समूह के मुखिया निक रीड ने कहा था कि वोडाफोन-आइडिया बंद होने के कगार पर है| हालांकि बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़मरोड़कर पेश किया| मगर आज कुमार मंगलम बिड़ला के बयान के बाद एक तरह से उस बयान की पुष्टि हो गई| हालांकि, हालत को संभालने के प्रयास में वोडाफोन-आइडिया ने पिछले दिनों टैरिफ बढ़ाने का फैसला भी लिया, लेकिन इससे जो फायदा होने की उम्मीद है वह जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त प्रतीत नहीं होती|

50,921 करोड़ रूपए का रिकॉर्ड घाटा हुआ

विदित हो की सितंबर तिमाही में वोडाफोन आइडिया को 50,921 करोड़ रूपए का रिकॉर्ड घाटा हुआ था| यह अभी तक किसी भी भारतीय कंपनी को हुआ सबसे ज्यादा तिमाही घाटा है| इसकी मुख्य वजह कंपनी पर मौजूद एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) की बकाया राशि है| सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वोडाफोन-आइडिया पर सरकार की अनुमानित 44,150 करोड़ रुपये की देनदारी है| ज्ञात हो की दूसरी तिमाही में हुए घाटे में AGR बकाए को चुकाने के लिए कंपनी ने 25,680 करोड़ रूपए रखा है जिससे घाटा बढ़कर 50,921 करोड़ रूपए हो गया|

सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करते हुए ही वोडाफोन आइडिया की ओर से कहा गया था कि वह AGR मामले में सुप्रीम कोर्ट आदेश पर पुर्नविचार याचिका दाखिल करने जा रही है| कंपनी का चल पाना इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार से राहत मिलती है या नहीं और कानूनी मसलों का कोई सकारात्मक समाधान होता है या नहीं| गौरतलब है की वोडाफोन ने सरकार से स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए दो साल का वक्त, लाइसेंस शुल्क में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ब्याज और जुर्माने में छूट सहित एक राहत पैकेज की मांग की थी| मगर सरकार ने हाल में टेलिकॉम सेक्टर के लिए उठाए गए क़दमों में AGR मामले में वोडाफोन के साथ किसी भी टेलिकॉम कंपनी को कोई राहत देने का प्रयास नहीं किया|

साल 2018 में बनी थी वोडाफोन-आइडिया

विदित हो की बिड़ला समूह ने साल 2018 में अपनी कंपनी आइडिया को वोडाफोन के साथ मिलाकर के देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बनाई थी| वोडाफोन-आइडिया के पास कुल 37 करोड़ ग्राहक होने का अनुमान है| इस कंपनी में 45 फीसदी हिस्सेदारी वोडाफोन की है| इसके अलावा कंपनी में ग्रासिम इंडस्ट्री की 12 फीसदी, बिड़ला TMC की एक फीसदी, हिंडाल्को की तीन फीसदी और 11 फीसदी बिड़ला समूह की अन्य कंपनियों की हिस्सेदारी है|

वैश्विक स्तर पर लाभ में है वोडाफ़ोन

ध्यान देने वाली बात यह है की वोडाफोन दुनिया की दूसरी बड़ी मोबाइल ऑपरेटिंग कंपनी है और स्पेन व इटली में सुधार के संकेतों से उसके राजस्व में लगातार सुधार हो रहा है| वर्ष 2019 की पहली छमाही में उसके राजस्व में 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी|

शेयरों में लगातार दूसरे दिन दर्ज हुई गिरावट

कुमार मंगलम बिड़ला के बयान को शेयर बाज़ार ने नकारात्मक तौर पर लिया और आज के उनके बयान के बाद BSE पर वोडा-आइडिया का शेयर 8.89% गिरकर 6.66 रुपए पर आ गया| गौरतलब है की ब्रिकवर्क रेटिंग्स के डाउनग्रेड करने की वजह से कल भी 5% गिरावट आई थी|

2017 के बाद बिड़ला की संपत्ति में आई कमी

एक रिपोर्ट के मुताबिक उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की संपत्ति में साल 2017 के बाद भारी कमी आई है| बिड़ला की नेट वर्थ दो साल में 9 अरब डॉलर से गिरकर 6 अरब डॉलर हो गया है| बिड़ला ग्रुप की कंपनी आइडिया ने पिछले साल वोडाफोन के साथ हाथ मिलाया था| वोडा-आइडिया के घाटे का प्रभाव भी बिड़ला की संपत्ति पर पड़ा है| इसके अलावा बिड़ला की दूसरी फ्लैगशिप कंपनियां जो कैमिकल, मेटल्स और सीमेंट का उत्पादन करती हैं,  विगत समय में उनको भी लगातार घाटा का सामना करना पड़ा है| इन सब का नकारात्मक प्रभाव बिड़ला की संपत्ति पर पड़ा है|

गौरतलब है की भारत में टेलिकॉम सेक्टर विगत कुछ समय से बहुत चर्चा का विषय रहा है और कुछ समय पूर्व ही Rcom ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया| भारती एयरटेल ने भी दूसरी तिमाही में भारी घाटा दिखाया है| इस सन्दर्भ में आगे क्या होता है यह तो भविष्य के गर्भ में छुपा है मगर भारत में टेलिकॉम सेक्टर के लिए आपार संभावनाओं और विशाल बाज़ार को देखते हुए कोई भी कंपनी भारत में अपना कारोबार बंद नहीं करना चाहती, यह तय है|