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9.3% बढ़ा कोयला आयात

12.69 करोड़ टन कोयले का आयात हुआ

भारत के पास कोयले का बड़ा खजाना है।कोयले के सबसे अधिक भंडार होने के बावजूद  देश का कोयला आयात चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में 9.3 प्रतिशत बढ़कर 12.69 करोड़ टन पर पहुंच गया|ये जानकारी उद्योग जगत द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से मिली|

बता दें कि कोयला व इस्पात क्षेत्र की ई-वाणिज्य कंपनी एमजंक्शन के आंकड़ों के अनुसार, इससे पिछले वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में कोयला आयात 11.60 करोड़ टन रहा था|जो की चालू वित्त वर्ष में 9.3% बढ़ गया है|एमजंक्शन टाटा स्टील और सेल का संयुक्त उपक्रम है|

एमजंक्शन ने बताया कि, ‘‘प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर के दौरान 12.69 करोड़ टन कोयले का आयात हुआ|यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 11.60 करोड़ टन से 9.36 प्रतिशत अधिक है|”मासिक आधार पर सितंबर महीने में कोयला आयात अगस्त की तुलना में 2.71 प्रतिशत कम होकर 1.86 करोड़ टन पर आ गया|यह इससे पिछले महीने यानी अगस्त में 1.91 करोड़ टन रहा था| सितंबर, 2018 में यह आंकड़ा 1.77 करोड़ टन रहा था| सितंबर में हुए कुल कोयला आयात में गैर-कोकिंग कोल का हिस्सा1.22 करोड़ टन और कोकिंग कोल का हिस्सा 45.9 लाख टन रहा|

क्यों करना पड़ता है आयात?

भारत द्वारा किये गए आयात में नॉन-कोकिंग कोल या थर्मल कोयले का हिस्सा 70 फीसदी से अधिक है। भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडार वाले देशों में है, लेकिन खनन में एकाधिकार प्राप्त कोल इंडिया पावर प्लांट्स, स्टील प्लांट्स, सीमेंट और फर्टिलाइजर्स यूनिट की आवश्यकताओं को पूरा करने लायक उत्पादन नहीं कर पा रही है। फरवरी 2018 में सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को भी कोयला खनन की मंजूरी दी है। कोयला क्षेत्र के 1973 में राष्ट्रीयकरण के बाद यह एक बड़ा रिफॉर्म माना जा रहा है।भारत में कोयला उत्पादन में कई बाधाएं हैं।भूमि अधिग्रहण (जो राज्य सरकारों का विषय है), कई मंजूरी ( पार्यवरण और वन) और कोयला परिवहन (कोयला ढोने के लिए रेलवे रैक्स की कमी) जैसी चुनौतियां हैं जो कोयला उत्पादन को जटिल बना देती हैं|