Arthgyani
होम > न्यूज > भारत पेट्रोलियम

BPCL सहित 5 सरकारी कम्पनियों के हिस्सेदारी बेचने पर लगी मुहर

भारत पेट्रोलियम सहित 5 सरकारी कम्पनियों की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की केन्द्रीय मंत्रीमंडल समिति की बैठक बुधवार को संपन्न हुई। बैठक में भारत पेट्रोलियम सहित 5 सरकारी कम्पनियों की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

हालाँकि वित्त वर्ष 2019 के दौरान केंद्र सरकार ने सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया था, जिनमें 28 पीएसयू समेत एयर इंडिया, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) जैसी दिग्गज कम्पनियों के नाम शामिल थे।

सरकार ने विनिवेश कार्यक्रम पर आगे बढ़ते हुए बुधवार को भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), शिपिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI), कंटेनर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CONCOR) , टेहरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक डेवलमेट कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (THDCIL) और नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO) में रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इनमे हिस्सेदारी बेचने के साथ साथ प्रबंधन नियंत्रण भी दूसरे हाथों में सौपा जायेगा।

एक नज़र

  •  5 सरकारी कम्पनी की हिस्सेदारी बेचने पर कैबिनेट की मुहर।
  • भारत पेट्रोलियम, शिपिंग कार्पोरेशन, THDCIL, कॉनकोर और नीपको की हिस्सेदारी बेचने पर मंजूरी।
  • सरकार पेट्रोलियम कम्पनी में अपनी 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी।
  • इनमे कम्पनियों का प्रबंधन नियंत्रण भी दूसरे हाथों में सौपा जायेगा।
  • नीपको और टेहरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक की 74.23 प्रतिशत हिस्सेदारी (NTPC) खरीदेगी।
  • लिस्ट में कुल 28 पीएसयू समेत एयर इंडिया जैसी दिग्गज कम्पनियों के नाम शामिल थे।
  • सरकार ने कुछ चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी 51फ़ीसदी से भी कम करने का निर्णय लिया है।

बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इन सरकारी उपक्रमों में विनिवेश का तरीका अलग अलग होगा। उन्होंने कहा कि असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी में बीपीसीएल की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत से अधिक है और इसको BPCL के नियंत्रण से बाहर कर सरकार पेट्रोलियम कम्पनी में अपनी 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। ज्ञातव्य हो कि पेट्रोलियम कम्पनी में सरकार की हिस्सेदारी 53.29 प्रतिशत है। नुमालीगढ़ रिफाइनरी की हिस्सेदारी तेल एवं गैस क्षेत्र की किसी सरकारी कंपनी को ही बेची जाएगी और इस प्रकार यह कंपनी सार्वजनिक उपक्रम बनी रहेगी। रणनीतिक खरीदार को यह हिस्सेदारी स्थानातंरित की जाएगी।

उन्होंने ये भी कहा कि शिपिंग कॉरपोरेशन में सरकार की हिस्सेदारी 63.75 प्रतिशत है जिसका विनिवेश किया जाएगा।कोनकोर में 54.80 प्रतिशत हिस्सेदारी में से 24 प्रतिशत हिस्सेदारी सरकार के पास रहेगी, लेकिन 30.80 प्रतिशत हिस्सेदारी  रणनीतिक निवेशकों को दिया जाएगा। नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर की शत प्रतिशत हिस्सेदारी और टीएसडीसीआईएल की 74.23 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन (NTPC) खरीदेगी। इन पांचों कंपनियों का प्रबंधन नियंत्रण विनिवेश के बाद सरकार के पास नहीं रह जाएगा।

श्रीमती सीतारमण ने बताया कि सरकार ने कुछ चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में प्रबंधन नियंत्रण अपने पास रखते हुए अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से भी कम करने का निर्णय लिया है, लेकिन आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए कंपनी टैक्स और न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स में दी गई छूट को मंत्रिमंडल ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके साथ ही गिफ्ट सिटी में बनने वाले यूनिफाइड ऑथिरिटी के संबंध में भी निर्णय लिए गए हैं। इसमें एक अध्यक्ष और आठ सदस्य होंगे।