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DHFL के विरुद्ध दिवालिया प्रक्रिया को कोर्ट की स्वीकृति

डीएचएफएल पर 83,873 करोड़ रुपए बकाया

दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई में रिजर्व बैंक को बड़ी सफलता मिली है| रिजर्व बैंक ने बीते शुक्रवार को कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए एनसीएलटी(नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) बेंच में एक अर्जी दाखिल की थी| एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने सोमवार को नकदी की तंगी का सामना कर रहे दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के खिलाफ इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया की शुरुआत करने की भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की याचिका स्वीकार कर ली है।

क्यों हुई ये कार्रवाई?

निवेशको एवं बैंकों की भारी देनदारी के कारण आरबीआई, डीएचएफएल के विरुद्ध ये कार्रवाई कर रहा है|विदित हो कि जुलाई 2019 में डीएचएफएल पर बैंकों, एनएचबी, म्यूचुअल फंडों और बॉन्ड धारकों के 83,873 करोड़ रुपए बाकी थे।जिसमें से 74,054 करोड़ के कर्ज सिक्योर्ड और 9,818 करोड़ रुपए के कर्ज अनसिक्योर्ड थे। रिटेल निवेशक अनसिक्योर्ड वर्ग में ही आते हैं। एसबीआई समेत ज्यादातर बैंक डीएचएफएल को दिए कर्ज को अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में एनपीए घोषित करने वाले हैं।डीएचएफएल को कर्ज देने वाली संस्थाएं कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी लेने पर विचार कर रही थीं।भारी देनदारी के कारण आरबीआई ने ये सख्त कदम उठाया है|

इस संशोधन से मिली मदद:

काबिलेगौर है कि रिजर्व बैंक(RBI) ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आइबीसी) की धारा 227 के तहत डीएचएफएल के विरुद्ध एनसीएलटी में आवेदन किया है।भारत सरकार ने 15 नवंबर 2019 को ही इस धारा को अधिसूचित किया था। जबकि इससे पहले फाइनेंस कंपनियों को दिवालिया कानून के दायरे से बाहर रखा गया था। केंद्रीय बैंक के आधिकारिक बयान के अनुसार, शीर्ष बैंक ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 के धारा 239 व धारा 227 के विभिन्न उपधाराओं के तहत डीएचएफएल के खिलाफ कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया की शुरुआत के लिए आवेदन किया।आरबीआई ने निजी क्षेत्र के कर्जदाता के प्रशासक को सलाह देने के लिए एक कमेटी भी नियुक्त की है।