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दवा में मिलावट! अब निर्माता के साथ मार्केटिंग कंपनियां भी होंगी जिम्मेदार

सरकार ने ड्रग्स कॉस्मैटिक एक्ट में बदलाव लाने के लिए किया है नोटिफिकेशन जारी

आज यह ट्रेंड बनता जा रहा है कि बड़े-बड़े नामीं कंपनियां किसी और की बनाई हुई वस्तुओं को खुद के ब्रांड नेम देकर मार्केटिंग के द्वारा बाज़ार में बेच देती हैं| इस कार्यप्रणाली से बड़ी-बड़ी कंपनियां वस्तुओं के विनिर्माण के झंझट से बच जाती हैं| कपड़ों और अन्य वस्तुओं तक तो यह कार्यप्रणाली काम चलाऊ मानी जा सकती हैं, मगर जब मेडिसिन जैसी सेंसिटिव और स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी जब यह चलन बढ़ते लगता है तो उसे खतरनाक कहा जा सकता है| अफ़सोस के साथ कहा जा सकता है यह प्रक्रिया मेडिसिन और दवा विनिर्माता कंपनियों द्वारा भी अपनाया जा रहा है| सरकार ने इसपर लगाम लगाने की घोषणा की है|

बड़ी दवा कंपनियां नियमों का करती हैं दुरूपयोग 

अब दवाओं की क्वालिटी खराब पाए जाने पर अब दवाओं की मार्केटिंग करने वाली कंपनियां भी समान रूप से जिम्मेदार होंगी| सरकार ने ड्रग्स कॉस्मेटिक एक्ट (Drug Cosmetic Act) में बदलाव कर इसे अमल में लाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है| इससे पहले तक केवल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की ही जवाबदेही तय थी| ज्ञात हो कि  दवाओं को लेकर कई तरह के विवाद हमेशा सामने आते रहे हैं| कभी इसमें मिलावट या कभी नकली दवा की शिकायत देखने को मिलती रही हैं|

आजीवन सजा का भी है प्रावधान 

मौजूदा कानून के तहत जो कंपनियां दवाएं बनाती हैं, वही जिम्मेदार मानी जाती हैं| इसी का फायदा बड़ी कंपनियां उठाती हैं| वह लाइसेंस लेकर खुद मार्केटिंग करती हैं, जबकि मैन्युफैक्चरिंग किसी छोटी कंपनी से कराती हैं और जिम्मेदारियों से बच निकलती हैं| लेकिन अब केंद्र सरकार ने जो नियम जारी किया है उसके तहत दवाओं की क्वालिटी खराब पाए जाने पर तीन से पांच साल की सजा हो सकती है| अगर मामला मिलावट का निकला तो आजीवन सजा देने का भी प्रावधान है|

अगले साल के मार्च से होंगी प्रभावी 

जीबिज़ की एक साझा रिपोर्ट के अनुसार इस नियम को पुर्णतः अभी थोड़ी देरी है| सरकार ने दवा कंपनियों को इन चीजों को दुरुस्त करने के लिए एक साल का मौका दिया है| नए नियम मार्च 2021 से अमल में आ जाएगा| इस नए नियम की खूबी यह है कि वैसी बड़ी कंपनियां जो छोटी कंपनियों से दवा बनवाकर मार्केटिंग करती थीं, अब वह भी समान रूप से जिम्मेदार मानी जाएंगी|

‘ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ ने 2018 में की थी सिफारिस 

ज्ञात हो कि दवाओं को लेकर केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सलाहकार संस्था ‘ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ ने वर्ष 2018 में इस बात की सिफारिश की थी कि जो दवा बनाने वाली कंपनियां हैं, उनके साथ-साथ मार्केटिंग करने वाली कंपनियों को भी समान रूप जिम्मेदार माना जाए|

सरकार के इस नियम से आम आदमी को फायदा होगा, भलें ही अभी इस नियम को लागू होने में एक वर्ष का समय है, मगर इस मामले में कहा जा सकता है कि, ‘देर आए, दुरुस्त आए|’