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FPO फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर क्या है, आइये जाने

आईपीओ से अलग है FPO फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) या दूसरा पब्लिक ऑफर

FPO फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को दूसरा पब्लिक ऑफर भी कहा जाता है। शेयर बाजार में पहले से शामिल या कहें सूचीबद्ध (लिस्टेड) कोई भी कंपनी फंड जुटाने के लिए सार्वजिनक तौर पर अपने शेयर बेचने की पेशकश करती है तो इसे फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर कहते हैं। कंपनी एक प्राइस बैंड तय करती है और FPO का विज्ञापन किया जाता है।कंपनी की पहली पेशकश आईपीओ कहलाती है, जिसके बाद कंपनी लिस्टेड होती है। लिस्टेड होने के बाद शेयर बेचने का सार्वजनिक प्रस्ताव एफपीओ कहलाता है। FPO को  Further Public Offer भी कहा जता है। FPO का मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त पूंजी जुटाना होता है।

FPO की प्रक्रिया

इसमें एप्लीकशन और अलॉट्मेंट के लिए एक अलग ही प्रक्रिया अपनायी जाती है। IPO की तरह FPO में भी मर्चेंट बैंकर की जरूरत पड़ती है जो रेड हेयरिंग प्रोस्पेक्टस बनाकर SEBI (Securities and Exchange Board of India) को देता है और सेबी की मंजूरी के बाद ही बिडिंग शुरू की जाती है, जिसके लिए 3-5 दिन का समय होता है। निवेशक ASBA  (Application Supported by Blocked Amount) के माध्यम से अपनी बिड डाल सकते हैं। बुक बिल्डिंग के बाद कट ऑफ प्राइस तय होते ही उन्हें शेयर बाजार पर लिस्ट कर दिया जाता है और शेयर एलॉट कर दिए जाते हैं। कट ऑफ प्राइस शेयरों की माँग के आधार पर तय होता है।

FPO लाने की शर्ते

अगर कोई कंपनी एफपीओ लाना चाहती है और उसने एक साल के अंदर नाम बदला है तो पिछले साल के राजस्व का कम से कम 50 फीसदी नए नाम वाली कंपनी की कारोबारी गतिविधियों से आना जरूरी है। हालांकि एफपीओ का इश्यू साइज, इश्यू लाए जाने से पहले कंपनी के नेटवर्थ के पांच गुना से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

FPO के प्रकार –

  1. Dilutive FPO – अगर कंपनी किसी FPO में अपने नए शेयर जारी करके बेचती है, उस FPO को Dilutive FPO कहते हैं। नए शेयर बनाने से बाजार में कुल शेयर की संख्या बढ़ जाती है जिस से कंपनी का लाभ पहले से ज़्यादा शेयर मे बंटती है। इस स्थिति में एक शेयर के हिस्से में पहले से कम लाभ मिलेगा। इसलिए इसको इक्विटी Dilution कहते हैं और इस FPO को Dilutive FPO कहते हैं.

यही कारण है कि  जब कोई कंपनी Dilutive FPO लाने का ऐलान करती है, तब उस कंपनी के शेयर के दाम आम तौर पर गिरने लगते हैं, क्युकी इससे शेयर धारक को नुकसान होता है।

   2. Non-Dilutive FPO– इस FPO में कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती बल्कि कंपनी के Promotor अपने कुछ शेयर बेचते हैं। जिसके कारण  कोई Equity Dilution नहीं होता। इसलिए इस FPO को Non-dilutive FPO कहा जाता है।

Dilutive और Non-dilutive में क्या है अंतर 

Dilutive और Non-dilutive FPO के बीच जो एक महत्वपूर्ण अंतर है वो कि Dilutive FPO द्वारा जुटाया गया पैसा कंपनी के पास जाता है। लेकिन Non-dilutive FPO के द्वारा जुटाया गया पैसा जिन शेयर धारक या Promotor ने अपने शेयर बेचे है, उनके पास जाता है ।इसलिए Dilutive FPO कंपनी के लिए लाभदायी भी है क्योंकि  इसका पैसा ज्यादातर कंपनी के क़र्ज़ को कम करने के लिए ही उपयोग किया जाता है।