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GST की हो सिर्फ दो दरें: रमेश चंद

नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य प्रो. रमेश चंद ने GST की सिर्फ दो दरें रखने पर दिया जोर और बार-बार परिवर्तन पर रोक की मांग की

विगत कुछ दिनों से माल एवं सेवा कर (GST) में संसोधन के लिए सरकार की तैयारियां जोरों से चल रही है| इसी के तहत पिछले दिनों GST कमिटी की मीटिंग हुई थी, मगर तमाम चर्चाओं के बाद फैसला सिर्फ लॉटरी के दरों के वृद्धि के संदर्भ में ही हो पाया है| अब एक और सलाह नीति आयोग के 3 पूर्णकालिक सदस्यों में से एक प्रो. रमेश चंद की तरफ से आया है| रमेश चंद ने कहा कि माल एवं सेवा कर (GST) के तहत सिर्फ दो टैक्स स्लैब होने चाहिए| इसके साथ ही उन्होंने कहा कि GST की दरों में बार-बार बदलाव के लिए मना करते हुए कहा कि इसमें बार बार बदलाव नहीं किया जाना चाहिए| सरकार को हर क्षेत्र में छूट और अनुदान नहीं देना चाहिए| यह सही नहीं होता है| इसके बजाए सरकार को अभी राजस्व का इस्तेमाल विकास कार्यों पर करना चाहिए| 15वें वित्त आयोग में शामिल रमेश चंद का कहना है कि केंद्र सरकार अकेले कृषि क्षेत्र को 1.2 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी देती है|

वर्तमान में GST के हैं चार टैक्स स्लैब 

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा है कि GST की सिर्फ दो स्लैब होने चाहिए| साथ ही उन्होंने कहा कि दरों में बदलाव बार-बार नहीं किया जाना चाहिए| जरूरत होने पर GST की दरों में वार्षिक आधार पर बदलाव किया जाना चाहिए| ज्ञात हो कि GST को एक जुलाई, 2017 से लागू किया गया है| उसके साथ ही सभी अप्रत्यक्ष कर इसमें समाहित हो गए| उस समय से GST की दरों में कई बार बदलाव किया जा चुका है| अभी जीएसटी के तहत चार स्लैब हैं- 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत|

कई उत्पाद ऐसे हैं जिनपर GST नहीं लगता है| वहीं पांच ऐसे उत्पाद हैं जिनपर GST के अलावा उपकर भी लगता है| रमेश चंद ने PTI भाषा से कहा कि जब भी कोई बड़ा कराधान सुधार लाया जाता है, तो शुरुआत में उसमें समस्या आती है| उन्होंने कहा कि ज्यादातर देशों में GST को स्थिर होने में समय लगा और भारत को भी थोडा समय लगेगा|

विदित हो कि नीति आयोग के सदस्य प्रो.रमेश चंद कृषि क्षेत्र को देखते हैं| उन्होंने GST की दरों में बार-बार बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे काफी समस्याएं होती हैं| केंद्रीय वित्त मंत्री की अगुवाई वाली GST परिषद वस्तुओं और सेवाओं पर कर की दर तय करती है| सभी राज्यों के वित्त मंत्री भी परिषद के सदस्य हैं|

GST के अन्य मुद्दे भी है महत्वपूर्ण 

जहां विभिन्न उत्पादों और सेवाओं पर GST की दर घटाने की मांग बार-बार उठती है वहीं कर के स्लैब घटाने की बात भी की जाती है| चंद ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र द्वारा जीएसटी की दर कम करने की मांग प्रवृत्ति बन कई है| ‘मेरा मानना है कि GST के मुख्य मुद्दे दरों को कम करने से कहीं बड़े हैं|’

उन्होंने कहा कि हम बार-बार दरों में बदलाव नहीं करना चाहिए| हमें अधिक दरें नहीं रखनी चाहिए| सिर्फ दो दरें होनी चाहिए| चंद ने आगे कहा कि हमें अपना ध्यान नए टैक्स लाने के बजाय अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से राजस्व संग्रह बढ़ाने पर लगाना चाहिए| दरों में बार-बार बदलाव करने से बचना चाहिए| उन्होंने कहा कि यदि दरों में बदलाव करने की जरूरत है भी, तो यह वार्षिक आधार पर होना चाहिए|

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद कृषि अर्थशास्त्री भी हैं| प्रसंस्कृत खाद्य मसलन डेयरी उत्पादों पर GST की दरें घटाने की मांग पर चंद ने कहा कि ऐसे उत्पादों पर पांच प्रतिशत की दर ‘काफी-काफी उचित है|

कौन हैं रमेश चंद?

प्रो. रमेश चंद वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री के पद और स्थिति में नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य हैं| उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) नई दिल्ली से कृषि अर्थशास्त्र में पीएच.डी. किया हुआ है| वह नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज और इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स के फेलो हैं| प्रो. चंद को कृषि अर्थशास्त्र और नीति के क्षेत्र में अनुसंधान और अध्यापन का 33 वर्ष का अनुभव है| वह पिछले 15 वर्षों से कृषि क्षेत्र के लिए नीति निर्माण में शामिल हैं| वह साथ ही खाद्य सुरक्षा और कृषि के भविष्य पर विश्व आर्थिक मंच की वैश्विक भविष्य परिषद के सदस्य भी हैं|

GST पर सरकारी तत्वों और कॉर्पोरेट जगत में चल रही चर्चा से उम्मीद की जा रही है कि सरकार GST के सन्दर्भ में अगले वर्ष से बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है| ऐसे भी GST के लागू होने के दिनांक से अभी तक इसके अंतर्गत आए बदलावों ने इसे जटिल बना दिया है| प्रो.रमेश चंद की सलाह काफी हद तक प्रासंगिक प्रतीत होती है और अगर सरकार इस सलाह पर अमल लाती है तो GST के सरलीकरण में यह एक अच्छा कदम होगा|