Arthgyani
होम > न्यूज > IMF की भारत को सलाह: सरकार उठाए ये 5 कदम, तब होगा देश का समुचित विकास

IMF की भारत को सलाह: सरकार उठाए ये 5 कदम, तब होगा देश का समुचित विकास

IMF की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ अपने अगले सप्ताह के भारत दौरे से पूर्व कही यह बात

IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की मुख्य अर्थशास्त्री गोपीनाथ (48) इस सप्ताह भारत आ रही हैं| गीता गोपीनाथ भारत के दौरे पर आने से पूर्व पीटीआई को दिए इंटरव्यू में भारत के अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए ये सलाह दी है| जिन्हें हम इन 5 बिन्दुओं में बांट सकते हैं:

1) घरेलू मांग और उत्पादन में वृद्धि

इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था में चक्रीय उतार चढ़ाव की स्थिति और संरचनात्मक चुनौतियों को देखते हुए हम घरेलू मांग में नरमी से निपटने वाली नीतियों के साथ उत्पादकता बढ़ाने तथा मध्यम अवधि में रोजगार सृजन में सहायक नीतियों की सिफारिश करते हैं| घरेलू खपत में कमी के साथ विनिर्माण क्षेत्र में नरमी के कारण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में 4.5 प्रतिशत रही| यह छह साल का न्यूनतम स्तर है| इसका समाधान घरेलू और ग्रामीण मांग में वृद्धि के द्वारा ही किया जा सकता है| क्योंकि मांग बढेगा तो उत्पादन स्वयम्भू बढेगा|

2) बैंकों के आर्थिक लेखा-जोखों की सफाई

बैंक, अन्य वित्तीय संस्थानों तथा कंपनी बही-खातों को दुरूस्त करना तथा बैंक कर्ज में तेजी लाने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में संचालन व्यवस्था को और बेहतर करना होगा| साथ ही गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में नकदी दबाव से उभरते वाले जोखिम पर नजर रखते हुए कर्ज प्रावधान की दक्षता को बढ़ाना शामिल हैं| NBFC की निगरानी और नियमन को मजबूत करने की भी जरूरत है|

विदित हो कि हाल में बहुत से भारतीय बैंकों के खातों में हेरफेर की खबर बाहर आई है| IMF के सलाह से ज्ञात होता है कि इन घटनाओं पर संस्था की पैनी दृष्टी है|

3) टैक्स सिस्टम में क्रमगत सुधार

सरकार की नीति प्राथमिकताओं में भरोसेमंद राजकोषीय मजबूती के रास्ते को भी शामिल किया जाना चाहिए| गीता गोपीनाथन ने इसपर कहा, ‘इसके लिये कर्ज के उच्च स्तर तथा सरकारी व्यय एवं घाटे के वित्त पोषण में कमी लाने की जरूरत है| इससे निजी निवेश के लिये वित्तीय संसाधन उपलब्ध होगा| यह सब्सिडी खर्च को युक्तिसंगत बनाकर तथा कर आधार बढ़ाने के उपायों के जरिए होना चाहिए|’ उन्होंने मध्यम अवधि में केंद्र तथा राज्य स्तर पर राजकोषीय मजबूती का आह्वान किया| उनकी राय में इसके लिये सार्वजनिक कर्ज के स्तर में कमी, कर कानूनों के अनुपालन तथा अनुशासन में सुधार के कदमों के साथ रजकोषीय प्रशासन में सुधार पर जोर देना होगा|

4) बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश

किसी भी देश का विकास बुनियाद की मजबूती के बिना नहीं हो सकता या लंबे समय तक टिका हुआ नहीं रह सकता| इसके लिए गीता गोपीनाथ ने बुनियादी क्षेत्र में मजबूती की सलाह दी| उन्होंने कहा की अभी संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिये उपयुक्त समय है|

5) श्रम बाजार में लचीलापन

गीता गोपीनाथ के अनुसार भारत को तेज और समावेशी विकास के लिए श्रम बाजार में लचीलापन जैसे बुनियादी सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए| प्रतिस्पर्धा और संचालन में सुधार के लिये श्रम, भूमि और उत्पाद बाजार में सुधारों के साथ बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश की जरूरत है ताकि भारत की बढ़ते युवा कार्य बल के लिये अच्छी और बेहतर नौकरियां सृजित हो सके| उन्होंने यह भी कहा, ‘चौतरफा समावेशी वृद्धि के लिये स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार जरूरी है|’’

5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए निवेश सही कदम

गीता गोपीनाथ ने भारत सरकार के कार्यप्रणाली पर बात करते हुए कहा की, ‘सरकार का मध्यम अवधि में लक्ष्य 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था पर पहुंचने का है| इसमें निवेश पर जोर सही कदम है| इसी प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने, बुनियादी ढांच व्यय में तेजी, माल एवं सेवा कर (GST) को दुरूस्त करना, प्रत्यक्ष कर सुधार तथा व्यापार अनुकूल नीति एजेंडा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को उपयुक्त ठहराया| उन्होंने कहा की अन्य बातों के अलावा सरकार के लिये नीतियों के मोर्चे पर मजबूती जरुरी है|

कौन है गीता गोपीनाथ?

गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुख्य अर्थशास्त्री का दायित्व संभालने वाली पहली महिला हैं| गीता गोपीनाथ का जन्म मैसूर, कर्नाटक में हुआ था| उन्होंने इसी साल यह पदभार संभाला है| उन्हें ऐसे समय इस वित्तीय संगठन के मुख्य आर्थिक सलाहकार की जिम्मेदारी दी गयी थी जब आर्थिक वैश्वीकरण की गाड़ी उल्टी दिशा में मुड़ रही थी और उससे बहुपक्षीय संस्थाओं के सामने भी चुनौतियां खड़ी हो रही थी| वह मुद्राकोष की आर्थिक सलाहकार और इसके अनुसंधान विभाग की निदेशक हैं| वह मुद्राकोष की 11वीं मुख्य अर्थशास्त्री हैं|