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प्रसिद्ध बैंकर K.V कामथ को केंद्रीय राज्य मंत्री बनाने की तैयारी!

नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत को भी मंत्री परिषद में जगह दी जा सकती है जगह

केंद्र सरकार ने आर्थिक मंदी से निपटनें के लिए प्रोफेसनल लोगों का सहयोग लेने की ठान चुकी है| इसके लिए सरकार अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्गज अनुभवी पेशेवरों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की तैयारी कर रही है| इसी संदर्भ में सूत्रों से एक खबर आ रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिग्गज बैंकर और BRICS बैंक के चेयरमैन K.V कामथ को जल्द ही अपने कैबिनेट में शामिल कर सकते हैं| न्यूज एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक कामत को वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया जा सकता है|

मंदी और बेरोजगारी की मार झेल रहे देश में आगामी बजट से पहले यह खबर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि देश के आर्थिक हालात कई मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण बनी हुई है| ब्रिक्स बैंक से जुड़ने से पहले कामत देश की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी Infosys के चेयरमैन और ICICI Bank के नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन रह चुके हैं| रिपोर्ट के मुताबिक मोदी कैबिनेट में स्वपन दासगुप्ता ओर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत को भी जगह मिल सकती है|

GDP ग्रोथ में रिकवरी के लिए सरकार क्र रही है प्रयास 

विदित हो कि लगातार गिरती GDP ग्रोथ में रिकवरी के लिए सरकार इंडस्ट्री के अनुभवी लोगों की मदद चाहती है| उद्योग जगत में कामथ की अच्छी पकड़ है| बैंकिंग सेक्टर में उनका काफी नाम है, वे अभी न्यू डेवलपमेंट बैंक के प्रेसिडेंट हैं| यह बैंक ब्रिक्स देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका में इन्फ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास की योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने का कार्य करती हैं| कामथ का अनुभव का फायदा विदेशी निवेश प्राप्त करने में भी हो सकती है|

सुरेश प्रभु की सरकार में वापसी संभव 

सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार अगर मंत्रिमंडल में विशेषज्ञों को शामिल करने पर जोर देने का निर्णय लिया तो वह नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमिताभ कांत को भी मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकती है| पूर्व में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा रेल मंत्रालय संभाल चुके सुरेश प्रभु भी मोदी सरकार में फिर से वापसी कर सकते हैं|

KV कामथ, अमिताभ कांत जैसे प्रोफेसनल लोगों को सरकार में शामिल करने के संकेत से पता चलता है कि सरकार अब मंदी और बेरोजगारी के समस्या का स्थाई समाधान करना चाहती है| वैसे तो सरकार से इस सन्दर्भ में कोई ऑफिसियल कन्फर्मेशन नहीं आया है, मगर ऐसा होता है तो प्रश्न है कि क्या ये पेशेवर लोग सरकार की आर्थिक फ्रंट में न समाप्त हो रही समस्या को समाप्त कर पाएंगे?