Arthgyani
होम > न्यूज > डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट के लिए खत्म होगा ओटीपी

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट के लिए खत्म होगा ओटीपी

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना होगा आसान

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से रोजाना होने वाले पेमेंट में ओटीपी की जरूरत खत्म हो सकती है। ग्‍लोबल कार्ड नेटवर्क प्रोवाइडर वीजा रोजमर्रा के ट्रांजैक्‍शन में टू-फैक्‍टर ऑथेंटिकेशन (2एफए) को हटाने की तैयारी में है। यानी इस तरह के ट्रांजैक्‍शन में ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। सुरक्षा के साथ समझौता न हो, इसके लिए 2एफए की बजाय जोखिम आधारित प्रॉम्‍प्‍ट प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। जहां ऐसा लगेगा कि ट्रांजैक्‍शन संदिग्‍ध है, वहां वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) की प्रक्रिया का इस्‍तेमाल होगा।

इसके लिए वीजा घरेलू नियामकों और अपने बैंकिंग पार्टनरों के साथ चर्चा करेगी। इसमें देखा जाएगा कि कैसे समय के साथ 2एफए नियमों में ढील दी जा सकती है। कंपनी चाहती है कि कार्डों के ट्रांजैक्‍शन के मामले में अंतरराष्‍ट्रीय नियमों की तर्ज पर बदलाव हों। ईटी को कंपनी के टॉप एग्‍जीक्‍यूटिव ने यह जानकारी दी।

वीजा ने एशिया-प्रशांत के बाजारों के लिए अपने सिक्‍योरिटी रोडमैप में यह बात कही। वीजा में हेड ऑफ रिस्‍क, एशिया-पैसिफिक जो कुनिंघम ने कहा, ”हमें लगता है कि 2एफए अहम है। लेकिन, हमारा मानना है कि इसका इस्‍तेमाल जोखिम के आधार पर हो।”

लेनदेन के जोखिम से बचा जाएगा 

अमूमन ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म पर डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्‍शन को सुरक्षा की दो परतों से सत्‍यापित किया जाता है। इसी को टू-फैक्‍टर ऑथेंटिकेशन कहते हैं। ट्रांजैक्‍शन को मंजूरी देनी की पहली परत में ग्राहक से कार्ड का विवरण और सीवीवी इत्‍यादि जैसी जानकारी मांगी जाती है। दूसरे चरण में ओटीपी देने के लिए कहा जाता है। यह ग्राहकों के मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। वीजा को लगता है कि सभी तरह के ट्रांजैक्‍शनों में इसकी जरूरत नहीं है।

इसकी जगह लेनदेन की जोखिम आधारित मॉनिटरिंग की बात हो रही है। यह काम एक खास तरह की प्रक्रिया ‘ईएमवी 3डी सिक्‍योर’ के जरिये होगा। हाल में सिंगापुर और ऑस्‍ट्रेलिया समेत कई देशों ने इस प्रक्रिया को अपनाया है।

कनिंघम का कहना है कि अगर आप जोखिम आधारित नजरिया अपनाते हैं तो ज्‍यादातर ट्रांजैक्‍शन बिना किसी बाधा के होंगे। ज्‍यादातर लेनदेन अमूमन कम वैल्‍यू के होते हैं। ये परिचित आईपी एड्रेस से होते हैं। इस कदम से डिजिटल पेमेंट और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी