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RBI की चालू वित्त वर्ष की अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा 6 फ़रवरी को

मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4-6 फ़रवरी को होगी।

वित्त वर्ष 2019-20 के लिये छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा इस वित्त वर्ष की आखिरी समीक्षा होगी। रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष की अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा बृहस्पतिवार को पेश करेगा।

समाचार एजेंसी से प्राप्त ख़बरों के अनुसार आरबीआई ने सोमवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक  4-6 फ़रवरी को होगी। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह मौद्रिक नीति समीक्षा छह फरवरी को वेबासाइट पर दोपहर से पहले डालेगा। यह समीक्षा ऐसे समय आएगी जब आर्थिक वृद्धि में नरमी बरकार है लेकिन मुद्रास्फीति बढ़ रही है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है जो 11 साल का न्यूनतम स्तर है।  इसका कारण विभिन्न घरेलू और वैश्विक कारक हैं।  घरेलू कारकों में सब्जी खासकर प्याज और टमाटर का महंगा होने के कारण उपभोग मांग में कमी शामिल है। इसी कारण दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति भी 7.3 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही।

प्रमुख सन्दर्भ 

  1. मौद्रिक नीति समिति (MPC) की  बैठक  4-6 फ़रवरी को होगी।
  2. यह छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा इस वित्त वर्ष की आखिरी समीक्षा होगी।
  3. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है
  4.  चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 11 साल का न्यूनतम स्तर है।
  5. दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति भी 7.3 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही।

डीबीएस ग्रुप रिसर्च की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि केंद्रीय नीतिगत दर को यथावत रख सकता है लेकिन वह नरम रुख बनाये रखेगा ताकि पूंजी की लागत स्थिर और अनुकूल बनी रहे।’’ पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने नीतिगत दर को यथावत 5.15 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। रेपो दर वह दर है जिसपर केंद्रीय बैंक अपने बैंकों को कर्ज देता है।

क्या ब्याज दरों में होगी कटौती 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक पोल में कहा है कि अक्टूबर तक केंद्रीय बैंक द्वारा अब नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव की संभावना नहीं है। इस पोल में बजट से ठीक पहले प्रमुख अर्थशास्त्री शामिल  हुए थे। उनके विचार में  मौजूद आर्थिक हालात को देखते हुए अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए ब्याज दरों में 25 आधार अंक यानी 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। अगर आरबीआई यह फैसला करती है तो नीतिगत ब्याज दर 4.90 फीसदी के स्तर पर आ जाएगा।  कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ब्याज दरों में कटौती न करने का फैसला थोड़े और लंबे समय के लिए रह सकता है।