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म्युचुअल फंड की वार्षिक समीक्षा आवश्यक है

निवेशकों के लिए समीक्षा आवश्यक है

समीक्षा हमारे रोजाना के जीवन से जुड़ा हुआ आवश्यक शब्द है|समीक्षा से हम हानि लाभ के आकलन को समझकर उपयोगी सुधार कर सकते हैं| निवेशकों के लिए समीक्षा अतीव आवश्यक कार्य है| अपने परिश्रम के धन को म्युचुअल फंड में निवेश करने वाला हर निवेशक इसके बदले उच्च रिटर्न चाहता है|कई बार बाजार की परिस्थितियों के कारण प्राप्त होने वाला प्रतिलाभ प्रतिकूल भी हो सकता है|अतः हर निवेशक को प्रत्येक वर्ष के अंत में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा अवश्य करनी चाहिए|आज जानते हैं वो आधार जो म्युचुअल फंड पोर्टफोलियो की समीक्षा के लिए आवश्यक हैं|

वार्षिक प्रदर्शन को जांचें?     

अपने म्युचुअल फंड पोर्टफोलियो की समीक्षा के लिए साल का अंतिम महीना उपयुक्त होता है|वर्ष के अंत में हमें निवेशित म्युचुअल फंड से जुड़े पूरे वार्षिक आंकड़े उपलब्ध होते हैं|इन आंकड़ों में महीनेवार वृद्धि एवं गिरावट का विवरण उपलब्ध होता है|निवेशक nav के आधार पर अपने म्युचुअल की वृद्धि का आकलन कर सकते हैं|

एसेट क्लास पर ध्यान दें:

कई बार बाजार के ऊपर जाने पर भी म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशक को अपेक्षानुसार रिटर्न नहीं मिलता| हालांकि अगर वर्ष 2019 की बात करें तो अधिकांश म्युचुअल फंड का प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं रहा है| जिसमें अधिकांश म्युचुअल फंड स्कीमों ने अच्छा रिटर्न नहीं दिया है|इस कैलेंडर वर्ष में ज्यादातर स्कीमों ने मामूली रिटर्न दिया है|ऐसे समय में निवेशक को अपने फंड के एसेट क्लास पर ध्यान जरूर देना चाहिए|आवश्यकता पड़ने पर प्रोफेशनल की मदद से अन्य क्लास में निवेश के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है|

बेंचमार्क के आधार पर करें आकलन:  

निवेशक को म्युचुअल फंड का आकलन बेंचमार्क के आधार पर करना चाहिए|दरअसल बेंच मार्क का आशय है फंड द्वारा पूर्व के वर्षों में दिया गया रिटर्न| किसी भी स्कीम का आकलन वर्तमान प्रदर्शन के आधार पर करना गलत होगा| इस प्रकार के आकलन से आप किसी निश्चित नतीजे तक नहीं पहुंच सकते |बेचमार्क से तुलना के बाद आप जान सकेंगे कि आपके म्युचुअल फंड का वर्तमान प्रदर्शन कैसा है| वर्तमान प्रदर्शन के एवरेज प्रदर्शन से तुलना के बाद आपको पता चल सकेगा कि आपकी स्कीम का प्रदर्शन वर्तमान सत्र में कैसा रहा|

ये भी ध्यान रखिये:

म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले हर निवेशक को ध्यान रखना चाहिए कि अल्प काल में औसत से कम  रिटर्न आने पर घबराने की जरूरत नहीं होती|स्कीम के कमजोर प्रदर्शन के पीछे सही कारण का पता लगाने की कोशिश कीजिये|इक्विटी स्कीम में कई बार छोटी अवधि में रिटर्न कम आते हैं|ये बाजार की दशाओं पर निर्भर करता है|इसलिए धैर्य बनाये रखना चाहिए|हालांकि  डेट स्कीम के एक साल के प्रदर्शन को ध्यान में रखना चाहिए| अगर आपकी स्कीम एक साल या दो साल के लिए कमतर प्रदर्शन करती है तो आपको स्कीम पर विचार करना चाहिए|